मैं परमाचार्य जगद्गुरु
परम ब्रह्मर्षि हूँ
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मुझे बुद्धत्व प्राप्त करने के लिए
नहीं करनी है
वर्षों की तपस्या,
यदि मैं सीधे खुद को
लिख लूँ परमबुद्ध
तो आपको क्या समस्या?
मुझे विश्वामित्र की तरह
महर्षि बनने के लिए
नहीं करनी है वर्षों की तपस्या।
अप्सराओं से भागने
और इंद्रियजीत बनने के लिए
नहीं करना श्रम
यदि मैं सीधे खुद को
लिख लूँ महर्षि
तो आपको क्या समस्या ?
मुझे हजारों वर्ष
एक पैर पर खड़े रहकर
आत्मजयी और योगिराज
कहलाने के लिए
नहीं करनी तपस्या।
यदि मुझे काशी विद्वत परिषद
योगिराज और जगद्गुरु
की उपाधि बिना तपस्या दे दे
या मैं खुद ही
खुद को लिख लूँ जगद्गुरू
आपको क्या समस्या ?
मुझे जीव भाव से ऊपर उठने
जीवों में समत्व देखने के लिए
दूसरे की स्त्री को मां समझने
दूसरे की संपति को
ढेले को भांति देखने के लिए
नहीं करनी तपस्या।
यदि मैं सीधे खुद को
परमहंस लिख लूँ
तो आपको क्या समस्या ?
मुझे परमतत्व को जानने के लिए
वर्षों गुफाओं में नहीं रहना
तितीक्षा नहीं करनी
नहीं करना जप
नहीं करनी तपस्या।
यदि मैं खुद को लिख लूँ
सीधे तत्वदर्शी
तो आपको क्या समस्या ?
अब सुनो मैंने डिजाइनर को कह दिया है
टाइपिस्ट ने टाइप कर दिया है
अंदर की बात बतानी नहीं,
अब मैं
अनंत श्री
जगद्गुरु
परम महाब्रह्मर्षि
योगिराज आचार्य परमहंस हूँ..
वैसे वशिष्ठ, और सप्तर्षि की
कोई हैसियत नहीं मेरे सामने
क्योंकि
समग्र
सृष्टि में 10000 वर्षों के इतिहास में
महा ब्रह्मर्षि केवल एक हुए हैं
"कुमार स्वामी जी"
जो देते हैं बीजमंतर (मंत्र नहीं, वे यही बोलते हैं)
अब मैं हूँ
इकलौता
"परमाचार्य
जगद्गुरु परम महाब्रह्मर्षि"।
अब नकल मत करना
आप धर्म रक्षा करते रहिए
मैं हूँ स्वयंभू...।
@अशोक सत्यवीर
#फालतू कविताएं (3)